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मानसून को लेकर सामने आई बड़ी खबर, इस वजह से थम गई रफ़्तार, 10% कम बारिश का अनुमान, जून-जुलाई में भी हीटवेव चलेगी  

On: May 30, 2026 3:45 AM
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मानसून को लेकर सामने आई बड़ी खबर, इस वजह से थम गई रफ़्तार, 10% कम बारिश का अनुमान, जून-जुलाई में भी हीटवेव चलेगी

नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री फिलहाल टलती नजर आ रही है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार श्रीलंका के ऊपर बने कम दबाव और तूफानी हवाओं के प्रभाव के कारण मानसून पिछले पांच दिनों से केरल तट के पास ही ठहरा हुआ है। अगले दो से तीन दिनों तक इसके आगे बढ़ने की संभावना भी कम बताई गई है।

आमतौर पर मानसून केरल तट पर 1 जून के आसपास पहुंचता है। हालांकि मौसम विभाग ने पहले 26 मई तक इसके केरल पहुंचने का अनुमान जताया था। ताजा आकलन के अनुसार अब मानसून करीब एक सप्ताह बाद केरल तट पर दस्तक दे सकता है। ऐसे में पूर्वानुमान के मुकाबले मानसून की एंट्री करीब 10 दिन तक विलंबित हो सकती है।

आईएमडी ने जून और जुलाई के दौरान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव की स्थिति बने रहने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार इन क्षेत्रों में सामान्य से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया जा सकता है।

मौसम विभाग ने इस वर्ष देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान व्यक्त किया है, जो सामान्य वर्षा से करीब 10 प्रतिशत कम है। इससे पहले 13 अप्रैल को जारी अनुमान में 80 सेंटीमीटर वर्षा की संभावना जताई गई थी। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में सामान्य औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।

जून में कई राज्यों में कम बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। वहीं राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश होने का अनुमान है।

खेती पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार मानसून के कोर जोन में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। यह क्षेत्र कृषि उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां की खेती मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहती है।

मानसून कोर जोन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना तथा उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कम बारिश होने पर फसलों और खाद्य उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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