बीकानेर। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में जूनियर एमबीबीएस छात्रों के साथ कथित रैगिंग और उत्पीड़न के मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मामले में कार्रवाई करते हुए सात आरोपी छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, आरोपियों के परिजनों को भी कॉलेज बुलाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संस्थान में रैगिंग और अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
एंटी रैगिंग कमेटी कर रही जांच
मामले की जांच एंटी रैगिंग कमेटी की अनुशासन समिति और संबंधित उप-समितियों की ओर से की जा रही है। फिलहाल आरोपी छात्रों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं, पीड़ित विद्यार्थियों की सुरक्षा और पहचान गोपनीय रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जो छात्र डर या संकोच के कारण खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं, उन्हें लिखित रूप में शिकायत देने और उसे गोपनीय शिकायत बॉक्स में डालने का विकल्प दिया गया है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने बुधवार को एंटी रैगिंग कमेटी के तहत गठित उप-समितियों की आपात बैठक लेकर जांच की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच पूरी करने के निर्देश दिए।
पर्सनैलिटी डेवलपमेंट के नाम पर दबाव बनाने का आरोप
मामला राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की एंटी रैगिंग सेल के संज्ञान में आने के बाद सामने आया। आरोप है कि सीनियर छात्र पर्सनैलिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के नाम पर जूनियर विद्यार्थियों पर कई तरह की पाबंदियां थोप रहे थे।
शिकायतों के अनुसार, जूनियर्स को ट्रिमर की 0.5 सेटिंग से बाल कटवाने, मूंछ-दाढ़ी नहीं रखने और सीनियर विद्यार्थियों का झुककर अभिवादन करने के लिए कहा जाता था। इसके अलावा, कथित तौर पर पांच पन्नों की अश्लील और अपमानजनक पीडीएफ पढ़ने का दबाव भी बनाया जाता था।
आरोप यह भी हैं कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले विद्यार्थियों को सामाजिक बहिष्कार करने और परीक्षाओं या कॉलेज के कार्यक्रमों में सहयोग नहीं देने की धमकियां दी जाती थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने कॉलेज प्राचार्य से छह बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई तेज की।
जूनियर छात्रों को ड्रेस कोड में मिली छूट
रैगिंग की आशंका को कम करने और नए विद्यार्थियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए कॉलेज प्रशासन ने प्रथम वर्ष के छात्रों को ड्रेस कोड में आने से अस्थायी राहत दी है। नए निर्देशों के अनुसार, छात्र अपना एप्रन बैग में रखकर ला सकेंगे और कॉलेज परिसर या कक्षा में पहुंचने के बाद उसे पहन सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य रास्ते में या कॉलेज के प्रवेश द्वार पर जूनियर छात्रों की पहचान के आधार पर उन्हें परेशान किए जाने की आशंका को कम करना है।
कॉलेज प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
प्रशासन ने विद्यार्थियों को अनुशासन बनाए रखने और रैगिंग जैसी गतिविधियों से दूर रहने की हिदायत दी है। अब जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कॉलेज प्रशासन का जोर पीड़ित छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और परिसर में भयमुक्त शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने पर है।








