बीकानेर। रेलवे में संभावित दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखने के लिए बुधवार को लालगढ़ रेलवे स्टेशन यार्ड में संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल के संरक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस अभ्यास में रेलवे, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सिविल डिफेंस, पुलिस और चिकित्सा विभाग की टीमों ने भाग लिया। मॉक ड्रिल में ट्रेन के दो कोच पटरी से उतरने और एक स्लीपर कोच के दूसरे कोच के ऊपर चढ़ने की स्थिति दर्शाई गई। इस दौरान 38 घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। अभ्यास के तहत ट्रेन संख्या 19720 (सूरतगढ़-जयपुर) के लालगढ़ स्टेशन यार्ड में प्रवेश के दौरान सुबह 11:11 बजे दो कोच के पटरी से उतरने की स्थिति बनाई गई। ट्रेन मैनेजर ने तत्काल स्टेशन मास्टर को सूचना दी, जिसके बाद कंट्रोल रूम के माध्यम से उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया। रेलवे प्रशासन ने दुर्घटना राहत ट्रेन (ART) और सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (SPART) को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, रेलवे अस्पताल, राजकीय अस्पताल, अग्निशमन विभाग, स्काउट-गाइड और पुलिस को भी राहत कार्यों में सहयोग के लिए अलर्ट किया गया। घटनास्थल पर पहुंची बचाव टीमों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राहत कार्य शुरू किया। एनडीआरएफ के जवानों ने अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से बचाव अभियान चलाया। सबसे पहले घटनास्थल की घेराबंदी कर अनावश्यक भीड़ को दूर किया गया। इसके बाद लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को धैर्य बनाए रखने और बचाव दल का सहयोग करने की अपील की गई। दुर्घटनाग्रस्त कोचों में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। मॉक ड्रिल के दौरान कुल सात एंबुलेंस की सेवाएं ली गईं। इनमें रेलवे, सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ 108 एंबुलेंस सेवा भी शामिल रही। घायलों को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न अस्पतालों में भेजने का अभ्यास किया गया। चिकित्सा टीम ने घायलों का विवरण तैयार किया और रेलवे कर्मचारियों ने कोचों की जांच कर यह सुनिश्चित किया कि अंदर कोई घायल शेष नहीं है।
पूरे अभियान की निगरानी ड्रोन कैमरों के माध्यम से की गई। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने घटनास्थल से लाइव प्रसारण की व्यवस्था की, जिसे मंडल कार्यालय और मुख्यालय के डिजास्टर मैनेजमेंट रूम में बैठे अधिकारियों ने देखा। इसके अलावा हेल्पलाइन काउंटर स्थापित कर टेलीफोन नंबरों की कार्यप्रणाली भी जांची गई। जनसंपर्क विभाग ने मीडिया को जानकारी उपलब्ध कराने तथा घायलों के परिजनों के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया।
दोपहर 12:15 बजे मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल ने मॉक ड्रिल को सफल घोषित किया। इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अभ्यास के दौरान रेलवे के संसाधनों और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। उन्होंने असिस्टेंट एनडीआरएफ प्रवीण कुमार, जयपुर मुख्यालय के चीफ रोलिंग स्टॉक वैभव सुहानी, सीएमओ सतबीर जाजड़ा सहित सभी टीमों के योगदान की सराहना की और भविष्य में भी इसी प्रकार समन्वय के साथ कार्य करने की अपेक्षा जताई।
वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अजय सिंह सेंगर ने भी अभ्यास में शामिल सभी विभागों और एजेंसियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक राजेंद्र सिंह चौधरी सहित मंडल के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रबंधन से जुड़े संसाधनों की कार्यशीलता जांचना और वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत सुनिश्चित करना था।









