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नेपाल-तिब्बत सीमा पर कुदरत का कहर: 168 मौतें, 1300 से ज्यादा लापता, 133 भारतीय भी शामिल

On: August 27, 2026 5:52 AM
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नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी। 26 अगस्त को आई इस आपदा में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर अब तक कम से कम 168 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1300 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। इनमें 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें कई कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा तबाही नेपाल के रसुवा और आसपास के पर्वतीय इलाकों में हुई है। ल्हेंदे खोला में अचानक बर्फ, चट्टान और मलबे का तेज बहाव आया, जिसने भोटे कोशी नदी को प्रभावित किया और आगे त्रिशूली नदी में तबाही मचा दी। बाढ़ का पानी नुवाकोट, धादिंग, चितवन समेत कई इलाकों तक पहुंचा। सड़कें, पुल, मकान और बिजली परियोजनाएं इसकी चपेट में आ गईं।

ग्लेशियर से जुड़ा मलबा बना तबाही का कारण

शुरुआती तौर पर इस आपदा को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन उपग्रह तस्वीरों और विशेषज्ञों के शुरुआती आकलन में बर्फ-चट्टान के विशाल मलबे के खिसकने और उसके बाद अचानक आए जलप्रवाह को बाढ़ का प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस मलबे ने नदी के बहाव को बाधित किया और फिर बड़ी मात्रा में पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर बह निकला।

133 भारतीय लापता, कैलाश यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ी

नेपाल में लापता लोगों की सूची में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 133 भारतीय लापता हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और अन्य देशों के नागरिक भी लापता बताए गए हैं।

हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू, दुर्गम इलाकों में मुश्किल

नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस के जवान राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। कई इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण राहत दलों की पहुंच मुश्किल हो गई है। हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास जारी है। खराब मौसम और ऊंचे जलस्तर के कारण कई स्थानों पर हवाई अभियान में भी दिक्कतें आ रही हैं। आपदा के बाद भारत और चीन समेत कई देशों ने नेपाल को राहत एवं बचाव कार्यों में सहायता की पेशकश की है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना है।

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