जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी फतेह राय सोनी की पूरी पेंशन स्थायी रूप से रोकने का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के अर्ध-न्यायिक आदेश को बाद में गलत कानूनी राय के आधार पर गलत मान लेना अपने आप में कदाचार नहीं माना जा सकता। न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित की एकल पीठ ने 30 अप्रैल 2025 के आदेश को रद्द करते हुए सरकार को दो माह में पेंशन बहाल करने और बकाया राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए।
फतेह राय सोनी वर्ष 2017 में बीकानेर में बंदोबस्त अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2002 में उनके द्वारा गोचर भूमि पर खातेदारी अधिकार देने से जुड़े आदेश को लेकर करीब 15 साल बाद आरोप पत्र जारी किया गया था। कोर्ट ने पाया कि आरोप पत्र, जांच रिपोर्ट या सजा के आदेश में भ्रष्टाचार, दुर्भावना, रिश्वत या निजी लाभ का कोई आरोप नहीं था। हाईकोर्ट ने देरी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के करीब 15 साल बाद आरोप पत्र और 23 साल बाद सजा तक कार्रवाई पहुंची। इस देरी का कोई संतोषजनक कारण भी नहीं बताया गया। फैसले से सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी को बड़ी राहत मिली है और उनकी पेंशन बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी फतेह राय सोनी ने जीता केस, सरकार को पेंशन बहाल करने के साथ बकाया राशि का भुगतान करने के निर्देश






