बीकानेर। कभी महाराजा करणी सिंह की निशानेबाजी ने दुनिया में बीकानेर का नाम रोशन किया था, अब उसी गौरवशाली विरासत को नई उड़ान देने की तैयारी है। सादुल क्लब में करीब सात करोड़ रुपए की लागत से विकसित की जा रही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज बीकानेर के युवा निशानेबाजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। यहां अत्याधुनिक तकनीक, ओलंपिक स्तर की मशीनों और विशेषज्ञ कोचिंग के जरिए ऐसे खिलाड़ी तैयार करने का लक्ष्य है, जो राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का तिरंगा लहरा सकें।
17 अत्याधुनिक मशीनों से तैयार हो रही शूटिंग रेंज
सादुल क्लब परिसर में स्थापित की जा रही इस शूटिंग रेंज में फिलहाल 17 मशीनें लगाई गई हैं। इनमें 15 मशीनें ट्रैप और दो मशीनें स्कीट स्पर्धा के लिए हैं। ये मशीनें इंग्लैंड की प्रतिष्ठित कंपनी प्रोमेटिक से मंगवाई गई हैं। मशीनों की स्थापना और तकनीकी व्यवस्थाओं के लिए इंग्लैंड से इंजीनियर केविन और जोस बीकानेर पहुंचे हैं। दोनों इंजीनियर मशीनों को स्थापित करने के काम में जुटे हुए हैं।
क्लब प्रबंधन के अनुसार, इस रेंज में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप तकनीकी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि स्थानीय खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय अभ्यास के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
ओलंपिक-2028 को ध्यान में रखकर तैयारी
प्रेस वार्ता में सादुल क्लब अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ और सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि शूटिंग रेंज में ओलंपिक स्तर की मशीनें लगाई जा रही हैं। उद्देश्य है कि बीकानेर के खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अभ्यास का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि युवा निशानेबाजों को तकनीकी सुविधाओं की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रशिक्षण के लिए देश के अनुभवी कोच नियुक्त किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर विदेशी प्रशिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएंगी। क्लब की मंशा है कि यहां अभ्यास करने वाले खिलाड़ी भविष्य में ओलंपिक सहित बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करें।
उद्धव सिंह हरासर ने दिया निशानेबाजी का लाइव डेमो
प्रेस वार्ता के दौरान उभरते युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने लाइव डेमो देकर मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने सिंगल ट्रैप और डबल ट्रैप की शूटिंग का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि बीकानेर में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।
उद्धव सिंह हरासर ने कहा कि विदेशों में भारत की तुलना में शूटिंग रेंज और तकनीकी सुविधाओं के अधिक अवसर उपलब्ध हैं। बीकानेर में विश्वस्तरीय शूटिंग रेंज विकसित होने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास का अवसर मिलेगा।
करणी सिंह और राज्यश्री कुमारी की विरासत को आगे बढ़ाने की पहल
बीकानेर का निशानेबाजी से पुराना और गौरवशाली रिश्ता रहा है। पूर्व महाराजा करणी सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी, वहीं उनकी पुत्री राज्यश्री कुमारी ने भी निशानेबाजी में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। दोनों को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और अपूर्वी चंदेला जैसे भारतीय निशानेबाजों ने भी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व कप प्रतियोगिताओं में देश का गौरव बढ़ाया है।
क्लब अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि सादुल क्लब का प्रयास है कि बीकानेर की इस खेल विरासत को नई पीढ़ी आगे बढ़ाए। आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को ऐसा मंच दिया जाएगा, जहां वे बड़े लक्ष्य हासिल करने की तैयारी कर सकें।
तकनीकी निरीक्षण के बाद शुरू होगी ट्रेनिंग
शूटिंग रेंज को नियमित प्रशिक्षण के लिए शुरू करने से पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी इसका निरीक्षण करेंगे। रेंज का तकनीकी परीक्षण करने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके आधार पर जिला प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त कर प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए सादुल क्लब की ओर से कुछ बंदूकें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी।
सादुल क्लब में पहले से 10 खेलों की सुविधाएं
सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि सादुल क्लब में बास्केटबॉल, टेनिस, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, क्रिकेट, पिकलबॉल, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स और तैराकी सहित विभिन्न खेलों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्लब में औसतन 300 से 400 बच्चे अभ्यास करते हैं। यहां प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं।













