बीकानेर, 26 सितंबर। सर्दी के मौसम में शीत के प्रकोप से उद्यानिकी फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उद्यान विभाग ने प्लास्टिक लो-टनल तकनीक को बढ़ावा देना शुरू किया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों को इस तकनीक के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि प्लास्टिक लो-टनल लगाने पर अनुमानित लागत 80 रुपए प्रति वर्गमीटर अथवा अनुबंधित फर्म की दर, दोनों में से जो भी कम हो, उसका 50 प्रतिशत अनुदान देय होगा। एक किसान को अधिकतम 2 हजार वर्गमीटर क्षेत्र के लिए नियमानुसार अनुदान दिया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि जो किसान इस योजना का पहले लाभ ले चुके हैं, उन्हें दोबारा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं अनुसूचित क्षेत्रों में लो-टनल की इकाई लागत सामान्य लागत से 15 प्रतिशत अधिक निर्धारित की गई है।
10 हजार वर्गमीटर में होगी प्लास्टिक टनल से खेती
उद्यान उपनिदेशक अनुसंधान ग्राह्य परीक्षण केंद्र प्रेमाराम ने बताया कि योजना के तहत जिले में कुल 10 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में प्लास्टिक टनल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 8 हजार वर्गमीटर सामान्य श्रेणी तथा 2 हजार वर्गमीटर अनुसूचित जाति के किसानों के लिए निर्धारित किया गया है।
अगेती सब्जियों से किसानों को मिल सकता है फायदा
प्लास्टिक टनल तकनीक में जमीन के ऊपर सुरंगनुमा ढांचा तैयार कर फसलों को प्लास्टिक से ढककर उगाया जाता है। इससे फसलों को कम तापमान और अन्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से बचाने में मदद मिलती है। साथ ही पौधों की शुरुआती वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है।
इस तकनीक के जरिए किसान सब्जियों की अगेती फसल तैयार कर सकते हैं। सामान्य समय से पहले बाजार में फसल पहुंचने पर बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है। टनल के अंदर तापमान और नमी जैसी परिस्थितियों को भी अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
उद्यान विभाग के अनुसार प्लास्टिक टनल जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों को मौसम आधारित जोखिमों से बचाने के साथ उत्पादन और आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है।







