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राजस्थान में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को कैबिनेट मंजूरी, सभी धर्मों के लिए समान विवाह-तलाक और उत्तराधिकार के प्रावधान

On: August 17, 2026 6:21 AM
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जयपुर। राजस्थान सरकार ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एक समान करने के उद्देश्य से ‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक-2026’ को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है। करीब 400 धाराओं वाले इस विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक में अनुसूचित जनजाति परिवारों तथा संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले वर्गों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। प्रस्तावित कानून में सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण संबंधी प्रावधानों में समानता लाने का प्रावधान किया गया है।
विवाह और तलाक के नियम
प्रस्तावित कानून के अनुसार लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होगी। बहुविवाह को मान्यता नहीं होगी और विवाह विच्छेद यानी तलाक कोर्ट के माध्यम से ही मान्य होगा। विवाह और तलाक का पंजीकरण भी निर्धारित समय सीमा में कराना होगा।
पंजीकरण नहीं कराने या निर्धारित प्रक्रिया में देरी करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। आवेदन खारिज करने पर रजिस्ट्रार को कारण बताना होगा तथा इसके खिलाफ 30 दिन में रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष अपील की जा सकेगी।
उत्तराधिकार में बेटा-बेटी को समान अधिकार
बिना वसीयत मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के हस्तांतरण के लिए तीन श्रेणियां प्रस्तावित की गई हैं। पहली श्रेणी में पति-पत्नी, संतान, मृत संतान के पति-पत्नी व बच्चे तथा माता-पिता शामिल होंगे। दूसरी श्रेणी में सौतेले माता-पिता, भाई-बहन सहित अन्य निकट संबंधी होंगे। तीसरी श्रेणी में अन्य रिश्तेदारों को रखा गया है। कोई उत्तराधिकारी नहीं होने की स्थिति में संपत्ति सरकार के पास जाने का प्रावधान होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त प्रावधान
प्रस्तावित विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं। बिना सूचना एक माह से अधिक समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर तीन माह तक की जेल और 10 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
गलत सूचना देने पर भी तीन माह तक की सजा और 10 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता है, जबकि नोटिस का जवाब नहीं देने पर छह माह तक की जेल और 25 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
जबरन सहमति के मामले में पांच साल तक की जेल का प्रावधान होगा। वहीं 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को शादीशुदा की तरह रखने की स्थिति में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।
राज्य सरकार के अनुसार प्रस्तावित समान नागरिक संहिता संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप तैयार की गई है। अब विधेयक विधानसभा में पेश होने के बाद इसकी आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

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